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मंदिरों को लेकर थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर हिंसक संघर्ष जारी, एक लाख लोग बेघर, जानिए पूरा मामला

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Posted On:Friday, July 25, 2025

मुंबई, 25 जुलाई, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच दो प्राचीन शिव मंदिरों को लेकर जारी सीमा विवाद हिंसक रूप ले चुका है और झड़पों का यह सिलसिला दूसरे दिन भी थमा नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीमा पर 12 स्थानों पर मुठभेड़ हुई है। थाई सरकार का कहना है कि इस संघर्ष के चलते अब तक 1 लाख से अधिक लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। झड़पों में थाईलैंड के 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक सैनिक और 14 आम नागरिक शामिल हैं, जबकि 46 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कंबोडिया की ओर से अब तक मृतकों और घायलों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में एक व्यक्ति के मारे जाने की बात कही जा रही है। थाईलैंड ने कंबोडिया की सीमा से सटे आठ जिलों में मार्शल लॉ लागू कर दिया है और सीजफायर की संभावना से इनकार किया है, जब तक कि कंबोडिया अपनी सैन्य कार्रवाइयों को नहीं रोकता। इस बढ़ते तनाव को देखते हुए थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्हें थाईलैंड-कंबोडिया सीमा से जुड़े सात राज्यों — उबोन रत्चथानी, सुरिन, सिसाकेत, बुरीराम, सा काओ, चंथाबुरी और ट्राट — में जाने से बचने की सलाह दी गई है।

यह विवाद 1000 साल पुराने दो मंदिरों, प्रीह विहियर और ता मुएन थॉम को लेकर है। इतिहास में खमेर और सियाम साम्राज्य के बीच सत्ता संघर्ष के कारण यह इलाका सदियों से विवादों में रहा है। औपनिवेशिक काल में फ्रांस और ब्रिटेन की सीमांकन प्रक्रिया के दौरान भी दोनों देशों के बीच कई बार सीमा को लेकर असहमति रही। साल 1907 में फ्रांसीसी शासन के अधीन कंबोडिया और थाईलैंड के बीच 817 किलोमीटर लंबी सीमा खींची गई, जिसमें प्रीह विहियर मंदिर कंबोडिया के हिस्से में और ता मुएन थॉम मंदिर थाईलैंड में दर्शाया गया, जिसे दोनों देश आज भी चुनौती देते हैं। ता मुएन थॉम मंदिर पर कंबोडिया का दावा है कि यह उसके ऐतिहासिक खमेर साम्राज्य का हिस्सा है, जो 9वीं से 15वीं सदी के बीच दक्षिण पूर्व एशिया के बड़े भूभाग पर फैला हुआ था। यह मंदिर भौगोलिक रूप से थाईलैंड की सीमा के भीतर आता है लेकिन कंबोडिया का मानना है कि यह उनके सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। इसी तरह, प्रीह विहियर मंदिर को लेकर 1959 में कंबोडिया ने अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जहां 1962 में कोर्ट ने यह मंदिर कंबोडिया को सौंपने का निर्णय सुनाया था। हालांकि थाईलैंड ने आसपास की जमीन पर अपना दावा बरकरार रखा, जिसके कारण यह विवाद समय-समय पर हिंसा में तब्दील होता रहा है। वर्तमान में इन दोनों मंदिरों के आसपास दोनों देशों की सेनाएं नियमित गश्त करती हैं, जिससे हालात अक्सर तनावपूर्ण बने रहते हैं। इस बार की झड़प भी ता मुएन थॉम मंदिर के पास ही हुई है, जिससे यह स्पष्ट है कि सीमा विवाद शांत होने के बजाय और गंभीर रूप ले रहा है।


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