अहमदाबाद न्यूज डेस्क: यह जानकारी गुजरात के इंजीनियरिंग छात्रों के लिए एक बेहतरीन अवसर है। गुजरात तकनीकी विश्वविद्यालय (GTU) द्वारा उठाया गया यह कदम राज्य को सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।
इस पहल के मुख्य विवरणों को 4 पैराग्राफ में नीचे समझाया गया है:
गुजरात तकनीकी विश्वविद्यालय (GTU) ने छात्रों के कौशल विकास की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया है। विश्वविद्यालय अब हर साल 40 प्रतिभावान छात्रों को 'इंडिया सेमीकंडक्टर वर्कफोर्स डेवलपमेंट प्रोग्राम' (ISWDP) के लिए प्रायोजित (Sponsor) करेगा। यह विशेष कार्यक्रम भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु द्वारा सिनोप्सिस (Synopsys) और सैमसंग के सहयोग से चलाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत साल 2025 में हुई थी।
यह योजना भारत सरकार के 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मिशन के तहत पूरे देश में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाइयां, असेंबली प्लांट और डिजाइन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। गुजरात इस मिशन में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है, जहां साणंद और धोलेरा जैसे क्षेत्रों में सेमीकंडक्टर से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कुशल पेशेवरों की बढ़ती मांग को देखते हुए IISc बेंगलुरु इस वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन करता है। GTU ने इस पहल के महत्व को समझते हुए विभिन्न इंजीनियरिंग शाखाओं के छात्रों को सेमीकंडक्टर तकनीकों में विशेष प्रशिक्षण दिलाने की जिम्मेदारी ली है। इससे न केवल छात्रों को आधुनिक तकनीक सीखने का मौका मिलेगा, बल्कि वे भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के लिए भी तैयार होंगे।
आर्थिक सहायता के तौर पर विश्वविद्यालय प्रत्येक छात्र के लिए लगभग 20,000 रुपये की प्रशिक्षण लागत और उस पर लगने वाले 18% GST का खर्च खुद उठाएगा। इस पहल से छात्रों के करियर की संभावनाओं में सुधार होने की उम्मीद है और यह भारत के तेजी से बढ़ते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में युवाओं की भागीदारी को और मजबूत करेगा।