अहमदाबाद न्यूज डेस्क: यह मामला एक कथित "आध्यात्मिक गुरु" प्रदीप जोतंगिया से जुड़ा है, जिसकी जमानत याचिका अहमदाबाद की एक सत्र अदालत ने खारिज कर दी है। जोतंगिया पर सूरत में एक बड़े नकली नोट (FICN) रैकेट को चलाने का आरोप है। कोर्ट का मानना है कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की एक "आपराधिक साजिश" है।
इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
गिरफ्तारी और जब्ती
बरामदगी: पुलिस ने जोतंगिया और उनके साथियों के पास से 2.10 करोड़ रुपये मूल्य के नकली नोट बरामद किए। ये सभी नोट 500 रुपये के मूल्यवर्ग के थे।
पहचान का दुरुपयोग: जिस SUV से ये लोग जा रहे थे, उसकी नंबर प्लेट पर 'आयुष मंत्रालय' लिखा हुआ था, ताकि पुलिस की चेकिंग से बचा जा सके।
छापेमारी: सूरत स्थित जोतंगिया के 'श्री सत्यम योग फाउंडेशन' आश्रम और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की गई, जहाँ से नोट छापने के उपकरण और अतिरिक्त नकली मुद्रा बरामद हुई।
रैकेट के पीछे की तकनीक और रणनीति
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने काफी पेशेवर तरीके से काम किया:
कच्चा माल: उन्होंने चीन के एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से सुरक्षा धागे (security thread) वाला उच्च गुणवत्ता वाला कागज आयात किया था।
क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग: इस कागज का भुगतान क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से किया गया था ताकि लेन-देन का पता न लगाया जा सके।
प्रशिक्षण: आरोपी ने यूट्यूब वीडियो देखकर नकली नोट छापने और आयुर्वेद के जरिए लोगों का "इलाज" करने का तरीका सीखा था।
बिजनेस मॉडल: वे इन नकली नोटों के बंडल एजेंटों को कुल मूल्य के 30% पर बेचते थे।
अपराध का उद्देश्य
प्रदीप जोतंगिया ने पुलिस को बताया कि वह आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और एक नया आश्रम बनाना चाहता था। इस नए आश्रम के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से उसने अपने शिष्यों से मिले 30 लाख रुपये के दान का उपयोग नकली नोट छापने की मशीनें और सॉफ्टवेयर खरीदने में किया।
अदालत की टिप्पणी
अहमदाबाद सत्र न्यायालय के न्यायाधीश जयेशकुमार पटेल ने जमानत नामंजूर करते हुए कहा कि जांच अभी जारी है और एफएसएल (FSL) रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि नोट नकली थे। कोर्ट ने इसे देश की आर्थिक स्थिरता के खिलाफ एक गंभीर अपराध माना है।
वर्तमान में जोतंगिया अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है और पुलिस अन्य फरार आरोपियों की तलाश कर रही है।