अहमदाबाद न्यूज डेस्क: यह घटना उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो बैंक के बाहर बैठने वाले अनाधिकृत व्यक्तियों या "ग्राहक सेवा केंद्रों" पर भरोसा करते हैं। इस धोखाधड़ी में अपराधी ने पीड़ित के बायोमेट्रिक डेटा और आधार का दुरुपयोग कर बैंक खातों तक पहुंच बनाई।
यहाँ इस मामले और बैंकिंग सुरक्षा से जुड़े प्रमुख बिंदु दिए गए हैं:
धोखाधड़ी का तरीका (Modus Operandi)
नकली सेटअप: आरोपी ने बैंक के ठीक बाहर एक साइनबोर्ड लगाकर खुद को "कस्टमर सर्विस" एजेंट के रूप में पेश किया।
बायोमेट्रिक चोरी: पीड़ित का पैसा जमा करने के बहाने, आरोपी ने उसके फिंगरप्रिंट और आधार विवरण लिए। इसी बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का उपयोग करके आरोपी ने पीड़ित के लिंक किए गए बैंक खातों से पैसे निकाल लिए।
त्वरित ट्रांजेक्शन: पीड़ित के फिंगरप्रिंट लेते ही कुछ ही मिनटों के भीतर ऑनलाइन पेमेंट हैंडल के जरिए दो अलग-अलग खातों से कुल 1.19 लाख रुपये काट लिए गए।
सुरक्षित बैंकिंग के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
साइबर विशेषज्ञ और पुलिस अक्सर इस तरह के 'आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम' (AePS) फ्रॉड से बचने के लिए निम्नलिखित सलाह देते हैं:
बायोमेट्रिक लॉक: नागरिक अपने बायोमेट्रिक डेटा (फिंगरप्रिंट) को 'm-Aadhaar' ऐप या UIDAI की वेबसाइट के माध्यम से Lock कर सकते हैं। इसे केवल तभी अनलॉक करें जब आपको वास्तव में इसकी आवश्यकता हो।
आधिकारिक चैनल: हमेशा बैंक शाखा के अंदर स्थित काउंटर या बैंक द्वारा अधिकृत बीसी (Business Correspondent) केंद्रों का ही उपयोग करें।
विवरण साझा न करें: कभी भी किसी अनजान व्यक्ति को अपना आधार नंबर, ओटीपी या पासबुक न दें, खासकर बैंक परिसर के बाहर।
यदि आप धोखाधड़ी का शिकार होते हैं तो क्या करें?
तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करें।
अपने बैंक को तुरंत सूचित करें ताकि संबंधित खातों को फ्रीज किया जा सके।