नयी दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और उसके परिणामस्वरूप वैश्विक विमानन क्षेत्र पर पड़ते प्रतिकूल प्रभावों को देखते हुए भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने अपनी संशोधित 'आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना' (ECLGS 5.0) के तहत घरेलू विमान सेवा कंपनियों के लिए 5,000 करोड़ रुपये के विशेष ऋण प्रावधान को मंजूरी दी है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और हवाई क्षेत्र (Airspace) के प्रतिबंधों ने एयरलाइंस के नकदी प्रवाह (Cash Flow) को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
तरलता संकट से उबारने की रणनीति
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य संकटग्रस्त एयरलाइंस को उनके दैनिक परिचालन के लिए आवश्यक 'वर्किंग कैपिटल' उपलब्ध कराना है।
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ऋण की सीमा: योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र एयरलाइन अपनी अधिकतम कार्यशील पूंजी का 100 प्रतिशत (अधिकतम 1,500 करोड़ रुपये तक) अतिरिक्त क्रेडिट के रूप में प्राप्त कर सकती है।
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सॉफ्ट लोन की शर्तें: यह ऋण अधिकतम सात वर्ष की अवधि के लिए होगा, जिसमें शुरुआती दो वर्षों के लिए 'मोरेटोरियम' (ऋण स्थगन) की सुविधा दी गई है, ताकि कंपनियों पर तत्काल भुगतान का बोझ न पड़े।
वैश्विक व्यवधानों के बीच स्थिरता का प्रयास
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर परिचालन चुनौतियों के बीच यह कदम भारतीय विमानन क्षेत्र को 'स्थिरता' प्रदान करेगा।
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बिना गारंटी शुल्क: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस योजना के तहत बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऋण पर सरकार पूर्ण गारंटी देगी और उधारकर्ताओं से कोई अतिरिक्त गारंटी शुल्क नहीं लिया जाएगा।
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समग्र समर्थन: कैबिनेट द्वारा मंजूर कुल 2.55 लाख करोड़ रुपये के समर्थन पैकेज में विमानन के साथ-साथ एमएसएमई (MSME) क्षेत्र को भी प्राथमिकता दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईसीएलजीएस 5.0 से न केवल एयरलाइंस को अपनी वित्तीय देनदारियां चुकाने में मदद मिलेगी, बल्कि यह यात्रियों के लिए हवाई किराए में संभावित भारी उछाल को रोकने में भी सहायक सिद्ध हो सकता है। सरकार के इस समयबद्ध हस्तक्षेप से भारतीय विमानन उद्योग को वैश्विक अस्थिरता के दौर में अपनी परिचालन निरंतरता बनाए रखने की नई ताकत मिली है।