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दिल्ली में ट्रकों का चक्का जाम 22 मई से तीन दिवसीय हड़ताल आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई पर संकट के बादल

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Posted On:Thursday, May 7, 2026

देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर बड़े परिवहन संकट की दहलीज पर खड़ी है। विभिन्न ट्रक यूनियनों ने सरकार की हालिया नीतियों के विरोध में 22 से 24 मई तक पूर्ण हड़ताल का आह्वान किया है। इस तीन दिवसीय विरोध प्रदर्शन के कारण दिल्ली की सीमाओं पर मालवाहक वाहनों की लंबी कतारें लग सकती हैं, जिससे शहर की रसद आपूर्ति (Supply Chain) पूरी तरह चरमरा जाने की आशंका है।

हड़ताल की मुख्य वजह: ECC और BS-4 पर पाबंदी

ट्रक ऑपरेटरों की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) में की गई भारी बढ़ोतरी है। यूनियनों का तर्क है कि कमर्शियल वाहनों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ उनके व्यवसाय को घाटे में धकेल रहा है। इसके साथ ही, दिल्ली में BS-4 (बीएस-4) श्रेणी के ट्रकों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध ने आग में घी डालने का काम किया है। ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि ये वाहन बहुत पुराने नहीं हैं और इन्हें अचानक बंद करना लाखों परिवारों की आजीविका पर प्रहार है। वे इस बात से भी क्षुब्ध हैं कि BS-6 जैसे प्रदूषण-मुक्त वाहनों से भी ईसीसी वसूला जा रहा है।

आम जनता पर क्या होगा असर?

हालांकि सरकार का तर्क है कि ये कड़े कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार दिल्ली के प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। तीन दिनों तक ट्रकों की आवाजाही रुकने से फल, सब्जी, दूध और दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की कमी हो सकती है। मंडियों में सामान न पहुँचने के कारण कीमतों में उछाल आने की प्रबल संभावना है।

आगे क्या?

फिलहाल ट्रक यूनियनें अपनी मांगों पर अडिग हैं और सरकार के साथ अब तक की बातचीत बेनतीजा रही है। यदि अगले 48 घंटों में कोई बीच का रास्ता नहीं निकलता, तो दिल्ली के प्रमुख बॉर्डर जैसे सिंघु, गाजीपुर और टिकरी पर ट्रकों की एंट्री बंद रहेगी। जानकारों के मुताबिक, यह हड़ताल लंबी खिंची तो दिल्ली के खुदरा बाजारों में जरूरी सामानों के लिए हाहाकार मच सकता है।


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