ताजा खबर
दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह फिर बने माता-पिता, घर आई नन्ही परी; दुआ को मिली छोटी बहन   ||    ग्लोबल सिटीज इंडेक्स में अहमदाबाद 571वें स्थान पर, अर्थव्यवस्था में बेहतर लेकिन पर्यावरण-जीवन स्तर म...   ||    हिसार से जम्मू और अहमदाबाद के लिए शुरू होगी सीधी उड़ान, 27 अक्टूबर से सेवा शुरू होने की उम्मीद   ||    भगवंत मान सरकार का बड़ा फैसला: पंजाब के 8 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स का डीए 8% बढ़ा   ||    नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी का कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन, गिरफ्तारी के बाद बंगाल की सियासत ...   ||    उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों का साइड इफेक्ट: माउंट मंटाप के नीचे तेजी से बढ़ रहे हैं भूकंप, वैज्...   ||    चंडीगढ़ में अनोखा 'आईफोन लंगर': फ्री में मिलेगा आईफोन, जानें क्या है पूरा प्लान   ||    टाटा सन्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग और टाटा ग्रुप के शेयरों में हलचल   ||    म्यूचुअल फंड्स की पसंद: जिन शेयरों ने दिया जबरदस्त रिटर्न   ||    ‘हनुमान अंश’ के बाद विशाल चतुर्वेदी लाएंगे ‘राम बोला’, तुलसीदास की जीवनगाथा पर होगी अगली फिल्म   ||   

यूपीआई (UPI) पर मर्चेंट फीस की तैयारी: बड़े ट्रांजैक्शंस पर लग सकता है MDR

Photo Source :

Posted On:Friday, July 17, 2026

क्या है मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) और क्या है नया प्रस्ताव?

एमडीआर (MDR) वह शुल्क या फीस है जो बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स किसी डिजिटल ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने और उसके सुरक्षित संचालन के लिए व्यापारियों से वसूलते हैं।

इस नए प्रस्ताव के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • सीमित दायरा: यह फीस केवल बड़े मर्चेंट्स (व्यापारियों और कॉरपोरेट) पर ही लागू होगी। छोटे दुकानदारों और आम जनता को इससे बाहर रखे जाने की उम्मीद है।

  • ट्रांजैक्शन लिमिट: यह मर्चेंट फीस केवल 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शंस पर ही लगाने का विचार है।

  • प्रस्तावित दर: रिपोर्ट के अनुसार, यह फीस 0.5 प्रतिशत से कम रखी जा सकती है।

  • अंतिम निर्णय की समयसीमा: सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर अभी चर्चा चल रही है और अगले दो हफ्तों के भीतर इस पर कोई अंतिम फैसला लिया जा सकता है।

क्या ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा असर?

इस खबर के सामने आने के बाद आम उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अब उन्हें भी यूपीआई पेमेंट के लिए अतिरिक्त चार्ज देना होगा?

राहत की खबर: सरकार के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य आम ग्राहकों से यूपीआई के इस्तेमाल के लिए पैसे लेना बिल्कुल नहीं है। यूपीआई का इस्तेमाल ग्राहकों के लिए पहले की तरह ही मुफ्त रहेगा। यह पूरी तरह से मर्चेंट-साइड (व्यापारी पक्ष) की अर्थव्यवस्था और पेमेंट इकोसिस्टम की मजबूती से जुड़ा मामला है।

क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?

वर्तमान में यूपीआई का दायरा और इसके जरिए होने वाले लेनदेन का आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। हालांकि, इस विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुचारू रूप से चलाने और मेंटेन करने के लिए बैंकों और फिनटेक कंपनियों को भारी लागत (Cost) उठानी पड़ती है।

  1. बढ़ता वित्तीय बोझ: यूपीआई का तेजी से विस्तार तो हुआ है, लेकिन इसके सर्वर और सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने में बैंकों और पेमेंट प्रोवाइडर्स का खर्च लगातार बढ़ रहा है।

  2. व्यावसायिक स्थिरता (Commercial Sustainability): विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे पेमेंट मॉडल को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए बैंकों और ऑपरेटरों को कमाई का जरिया देना जरूरी है।

  3. सरकारी इंसेंटिव पर निर्भरता: फिलहाल सरकार 2,000 रुपये तक के कम मूल्य वाले ट्रांजैक्शंस के लिए वित्तीय संस्थानों को प्रोत्साहन राशि (Incentive) देती है। वित्त वर्ष 2022 में "RuPay डेबिट कार्ड और BHIM-UPI लेनदेन" को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष इंसेंटिव स्कीम शुरू की गई थी, लेकिन अब इसे आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो यह भारत के डिजिटल पेमेंट परिदृश्य में अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक बदलाव साबित हो सकता है।


अहमदाबाद और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. ahmedabadvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.