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E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा बयान, माइलेज घटने की बात मानी लेकिन इंजन खराब होने के दावों को बताया गलत

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Posted On:Saturday, July 11, 2026

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह के दावे वायरल हुए हैं। इनमें कहा गया कि E20 पेट्रोल से वाहन का माइलेज कम हो जाता है और इंजन, फ्यूल टैंक, रबर पाइप तथा अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है। इन दावों पर मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कुछ वाहनों में E20 के इस्तेमाल से 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज में कमी आ सकती है, लेकिन इससे इंजन या वाहन के अन्य हिस्सों के खराब होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

मंत्रालय ने कहा कि समय-समय पर एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर कई अफवाहें फैलती रही हैं। इनमें इंजन जाम होने, फ्यूल टैंक में जंग लगने और रबर के पाइप खराब होने जैसे दावे शामिल हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि वैज्ञानिक परीक्षणों और तकनीकी अध्ययनों में इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए उपभोक्ताओं को केवल अपुष्ट जानकारी के आधार पर भ्रमित नहीं होना चाहिए।

सरकार का यह भी कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम केवल ईंधन नीति नहीं, बल्कि किसानों, उद्योगों और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा राष्ट्रीय अभियान है। एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों, सहकारी समितियों, निजी कंपनियों और सरकारी संस्थानों ने हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया है। यदि अब अचानक E20 नीति को वापस लिया जाता है, तो यह निवेश और उत्पादन क्षमता दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 में से अपनी पसंद का ईंधन चुनने का विकल्प मिलना चाहिए। इस पर मंत्रालय ने कहा कि देशभर में तीन अलग-अलग प्रकार के पेट्रोल की सप्लाई, स्टोरेज और वितरण की व्यवस्था करना बेहद चुनौतीपूर्ण और महंगा होगा। इससे लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ेगी और ईंधन आपूर्ति प्रणाली अधिक जटिल हो जाएगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से कम होती है, लेकिन इसका उत्पादन हमेशा सस्ता नहीं होता। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो E20 तैयार करना शुद्ध पेट्रोल की तुलना में महंगा पड़ सकता है। वहीं, जब कच्चे तेल की कीमत 120 से 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है, तब एथेनॉल अपेक्षाकृत किफायती विकल्प बन जाता है।

सरकार का कहना है कि E20 नीति का उद्देश्य केवल पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना नहीं है, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ाना भी है।


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