ताजा खबर
​अहमदाबाद: बायोमेट्रिक डेटा के जरिए फैक्ट्री कर्मचारी से 1.1 लाख की ठगी   ||    ​GTU की नई पहल: छात्रों को मिलेगी सेमीकंडक्टर क्षेत्र में मुफ्त ट्रेनिंग   ||    ​नकली मुद्रा रैकेट: 'योग गुरु' की जमानत याचिका खारिज   ||    ​अहमदाबाद नगर निगम चुनाव: भाजपा की ऐतिहासिक जीत   ||    टाटा ट्रस्ट्स का बड़ा फैसला! ट्रस्टियों के कार्यकाल में नहीं होगा बदलाव, सरकारी अध्यादेश ने बदली रणन...   ||    भारत के डेटा इकोसिस्टम में बड़ा कदम, मुकेश अंबानी यहां कर रहे हैं 1.6 लाख करोड़ का मेगा निवेश   ||    IPL 2026 आरसीबी की ऐतिहासिक जीत हेजलवुड और भुवनेश्वर की धारदार गेंदबाजी के सामने दिल्ली कैपिटल्स 75 ...   ||    ​उदयपुर हत्याकांड: इलाज कराने अहमदाबाद गए 10-10 हजारी दो हिस्ट्रीशीटर गिरफ्तार, प्राइवेट पार्ट की चो...   ||    ​बुलेट ट्रेन अपडेट: साबरमती नदी पर 12 मंजिल की ऊंचाई पर दौड़ेगी ट्रेन, 118 फीट ऊंचे पुल का काम अंतिम...   ||    ITR Filing Alert टैक्स भरने में चालाकी पड़ेगी भारी! सरकार वसूलेगी दोगुना पैसा, तुरंत जान लें ये नियम   ||   

वक्फ कानून पर रोक से SC का इनकार, केंद्र सरकार से पूछा, क्या हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में मुस्लिमों को जगह देंगे, जानिए पूरा मामला

Photo Source :

Posted On:Wednesday, April 16, 2025

मुंबई, 16 अप्रैल, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। केंद्र सरकार के वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस कानून के खिलाफ 100 से ज्यादा याचिकाएं लगाई गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन पर केंद्र से जवाब मांगा है, लेकिन कोर्ट ने कानून के लागू होने पर रोक नहीं लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून के विरोध में देशभर में हो रही हिंसा पर चिंता जताई। इस पर SG ने कहा कि ऐसा नहीं लगना चाहिए कि हिंसा का इस्तेमाल दबाव डालने के लिए किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि हम इस पर फैसला करेंगे। सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि वक्फ कानून के तहत बोर्ड में अब हिंदुओं को भी शामिल किया जाएगा। यह अधिकारों का हनन है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि क्या वह मुसलमानों को हिंदू धार्मिक ट्रस्टों का हिस्सा बनने की अनुमति देने को तैयार है। हिंदुओं के दान कानून के मुताबिक, कोई भी बाहरी बोर्ड का हिस्सा नहीं हो सकता है। CJI संजीव खन्ना और जस्टिस पीवी संजय कुमार, जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच मामले पर सुनवाई कर रही है। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता पैरवी कर रहे हैं। वहीं कानून के खिलाफ कपिल सिब्बल, राजीव धवन, अभिषेक मनु सिंघवी, सीयू सिंह दलीलें रख रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट अब सुनवाई करेगा। सुनवाई में अपीलकर्ताओं ने वक्फ बोर्ड बनाने, पुरानी वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन, बोर्ड मेंबर्स में गैर-मुस्लिम और विवादों के निपटारों को लेकर मुख्य दलीलें दीं। अपीलकर्ता कपिल सिब्बल ने कहा, हम उस प्रावधान को चुनौती देते हैं, जिसमें कहा गया है कि केवल मुसलमान ही वक्फ बना सकते हैं। सरकार कैसे कह सकती है कि केवल वे लोग ही वक्फ बना सकते हैं जो पिछले 5 सालों से इस्लाम को मान रहे हैं? इतना ही नहीं, राज्य कैसे तय कर सकता है कि मैं मुसलमान हूं या नहीं और इसलिए वक्फ बनाने के योग्य हूं? सिब्बल ने कहा, यह इतना आसान नहीं है। वक्फ सैकड़ों साल पहले बनाया गया है। अब ये 300 साल पुरानी संपत्ति की वक्फ डीड मांगेंगे। यहां समस्या है। केंद्र की ओर से SG तुषार मेहता ने कहा कि वक्फ का रजिस्ट्रेशन हमेशा अनिवार्य रहेगा। 1995 के कानून में भी ये जरूरी था। सिब्बल साहब कह रहे हैं कि मुतवल्ली को जेल जाना पड़ेगा। अगर वक्फ का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ तो वह जेल जाएगा। यह 1995 से है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'कई पुरानी मस्जिदें हैं। 14वीं और 16वीं शताब्दी की मस्जिदें है, जिनके पास रजिस्ट्रेशन सेल डीड नहीं होगी। CJI ने केंद्र से पूछा कि ऐसी संपत्तियों को कैसे रजिस्टर करेंगे। उनके पास क्या दस्तावेज होंगे? वक्फ बाई यूजर मान्य किया गया है, अगर आप इसे खत्म करते हैं तो समस्या होगी। सिब्बल ने कहा, 'केवल मुस्लिम ही बोर्ड का हिस्सा हो सकते थे। अब हिंदू भी इसका हिस्सा होंगे। यह अधिकारों का हनन है। आर्टिकल 26 कहता है कि सभी मेंबर्स मुस्लिम होंगे। यहां 22 में से 10 मुस्लिम हैं। अब कानून लागू होने के बाद से बिना वक्फ डीड के कोई वक्फ नहीं बनाया जा सकता है।

CJI जस्टिस खन्ना ने कहा, इसमें क्या समस्या है? जस्टिस कुमार ने कहा, 'हमें उदाहरण दीजिए। क्या तिरुपति बोर्ड में भी गैर-हिंदू हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि क्या वह मुसलमानों को हिंदू धार्मिक ट्रस्टों का हिस्सा बनने की अनुमति देने को तैयार है। हिंदुओं के दान कानून के मुताबिक, कोई भी बाहरी बोर्ड का हिस्सा नहीं हो सकता है। वक्फ प्रॉपर्टी है या नहीं है, इसका फैसला अदालत को क्यों नहीं करने देते। संसद से 4 अप्रैल को पारित हुए वक्फ संशोधन बिल को 5 अप्रैल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। सरकार ने 8 अप्रैल से अधिनियम के लागू होने की अधिसूचना जारी की। तब से इसका लगातार विरोध हो रहा है।


अहमदाबाद और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. ahmedabadvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.