मध्य-पूर्व में जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच ईरान के भीतर से मानवाधिकारों के हनन की रोंगटे खड़े कर देने वाली खबरें सामने आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की गई संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद से तेहरान प्रशासन ने अपने ही नागरिकों के खिलाफ दमनकारी अभियान तेज कर दिया है। पिछले कुछ सप्ताह के भीतर ही ईरान ने कम से कम 21 लोगों को फांसी पर लटका दिया है और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर 4,000 से अधिक लोगों को सलाखों के पीछे डाल दिया है।
फांसी और गिरफ्तारियों की वजह
यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने खुलासा किया कि इन सजाओं का सीधा संबंध जनवरी 2026 में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और हालिया युद्ध से है। फांसी पाने वालों में:
- 9 लोग: जनवरी के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोपी थे।
- 10 लोग: विपक्षी गुटों की सदस्यता और 'देशद्रोह' के आरोपी पाए गए।
- 2 लोग: इजरायल और अमेरिका के लिए जासूसी करने के आरोप में मौत की सजा पाए।
अधिकारियों ने 4,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें से कई के ठिकाने अज्ञात हैं। रिपोर्ट में 'जबरन कबूलनामे' और जेलों में अमानवीय यातनाओं के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
UN की अपील: "क्रूरता पर तुरंत रोक लगे"
वोल्कर तुर्क ने ईरानी अधिकारियों से अपील की है कि वे मृत्युदंड पर तत्काल रोक लगाएं और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा, "ईरानी लोगों के मानवाधिकारों को जिस कठोर तरीके से छीना जा रहा है, वह स्तब्ध करने वाला है।" गौरतलब है कि चीन के बाद ईरान दुनिया का वह देश है जहाँ हर साल सबसे ज्यादा फांसी दी जाती है।
युद्ध और कूटनीति पर संकट
यह कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी समझौते की उम्मीद धुंधली पड़ती जा रही है। ईरान ने शांति वार्ता के दूसरे दौर में शामिल होने से इनकार कर दिया है, जबकि अमेरिका लगातार सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है। क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है क्योंकि ईरान ने 'आंतरिक सफाए' के नाम पर विरोधियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।