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'डील करनी होती तो 26 दिन भूखा क्यों रहता...': अनशन टूटने पर उठे सवालों पर भड़के सोनम वांगचुक, आलोचकों को दिया करारा जवाब

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Posted On:Saturday, July 25, 2026

उनके समर्पण पर सवाल उठाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है? उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अनशन किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि लद्दाख के लोगों के अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण के लिए था।

सोनम वांगचुक का तीखा जवाब

"अगर मुझे कोई सौदा या डील करनी होती, तो मैं 26 दिनों तक भीषण गर्मी में भूखा क्यों रहता? मैं अपने घर के किसी आरामदायक एयरकंडीशन कमरे में बैठकर भी आसानी से डील कर सकता था।"

वांगचुक ने वीडियो के जरिए आलोचकों को करारा जवाब देते हुए कहा कि जनता के बीच उनकी निष्ठा और ईमानदारी किसी प्रमाण की मोहताज नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों समाज में सच की लड़ाई लड़ने वाले हर व्यक्ति के चरित्र पर तुरंत उंगलियां उठाई जाने लगती हैं।

अनशन टूटने के बाद क्यों उठे सवाल?

  • लंबे समय तक विरोध: सोनम वांगचुक लद्दाख को छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर लगातार आंदोलनरत हैं।

  • स्वास्थ्य पर असर: 26 दिनों तक लगातार भूख हड़ताल पर रहने के कारण उनका स्वास्थ्य काफी बिगड़ गया था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने अनशन तोड़ा।

  • राजनीतिक बयानबाजी: अनशन समाप्त करने के बाद विरोधी दलों और कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी नीयत पर सवाल खड़े किए, जिससे आहत होकर वांगचुक को सफाई देनी पड़ी।

आंदोलन की आगे की दिशा

सोनम वांगचुक ने यह साफ कर दिया है कि भले ही उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा हो और उनका वजन 11 किलो तक घट गया हो, लेकिन लद्दाख के हितों के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने जनता से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और लद्दाख के हकों की इस अहिंसक लड़ाई में उनका साथ देते रहें।


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