सिंगापुर: अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल (Interpol) के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर चलाए गए एक व्यापक अभियान 'ऑपरेशन पेंजिया 18' ने अवैध दवा व्यापार की कमर तोड़ दी है। गुरुवार, 07 मई 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के तहत दुनिया भर के 90 देशों और क्षेत्रों में 1.55 करोड़ डॉलर (लगभग 130 करोड़ रुपये) मूल्य की 64.2 लाख से अधिक नकली और अवैध दवाएं जब्त की गई हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य उन आपराधिक समूहों को निशाना बनाना था जो इंटरनेट का लाभ उठाकर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
आपराधिक नेटवर्कों पर सर्जिकल स्ट्राइक
10 से 23 मार्च 2026 तक चले इस सघन अभियान के दौरान कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है:
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गिरफ्तारियाँ और जांच: ऑपरेशन के दौरान कुल 269 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और 66 खतरनाक आपराधिक समूहों का भंडाफोड़ किया गया।
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डिजिटल सफाई: अवैध दवाओं की ऑनलाइन बिक्री कर रहे लगभग 5,700 वेबसाइटों, सोशल मीडिया पेजों और बॉट्स को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
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प्रमुख जब्ती: जब्त किए गए उत्पादों में सबसे अधिक संख्या नींद की गोलियों, दर्द निवारक दवाओं, एंटीबायोटिक्स और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की दवाओं की रही।
कैंसर के 'झूठे' इलाज और अवैध फैक्टरियां
इस साल के अभियान में एक चिंताजनक रुझान सामने आया है, जहाँ आइवरमेक्टिन और फेनबेंडाजोल जैसी दवाओं को बिना किसी वैज्ञानिक आधार के कैंसर के इलाज के तौर पर बेचा जा रहा था।
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अवैध उत्पादन: बुल्गारिया में स्टेरॉयड बनाने वाली एक पूरी फैक्ट्री को नष्ट कर दिया गया, जबकि दक्षिण-पूर्व एशिया में वजन घटाने वाली नकली 'जीएलपी-1' दवाओं का भारी स्टॉक बरामद हुआ।
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क्षेत्रीय प्रभाव: ब्रिटेन और कोलंबिया जब्ती के मामले में शीर्ष पर रहे। भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने इस साझा ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इंटरपोल के महासचिव वाल्डेसी उरक्विज़ा ने चेतावनी दी है कि नकली दवाएं केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट हैं। उन्होंने जनता से आग्रह किया है कि वे केवल प्रमाणित स्रोतों से ही दवाएं खरीदें, क्योंकि अपराधियों के लिए मुनाफा मानव जीवन से अधिक महत्वपूर्ण है। इस अभियान ने साबित कर दिया है कि सीमा पार सहयोग के जरिए ही ऐसे जटिल अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों को रोका जा सकता है।