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फिल्म रिव्यु - “राजा शिवाजी” भव्यता, भावनाएं और इतिहास—तीनों का अच्छा मेल है।



रितेश देशमुख ने बतौर डायरेक्टर “राजा शिवाजी” की कहानी को सिर्फ बड़े कैनवास पर नहीं, बल्कि दिल के कर...


Posted On:Friday, May 1, 2026


महाराष्ट्र दिवस पर आई “राजा शिवाजी” सिर्फ इतिहास सुनाने वाली फिल्म नहीं है, बल्कि एक एहसास है—स्वराज्य का, गौरव का और उस जज़्बे का जिसने एक साम्राज्य की नींव रखी। रितेश देशमुख ने बतौर डायरेक्टर इस कहानी को सिर्फ बड़े कैनवास पर नहीं, बल्कि दिल के करीब लाने की कोशिश की है।
फिल्म को ज्योति देशपांडे और जेनेलिया देशमुख ने प्रोड्यूस किया है, जबकि जियो स्टूडियोज की प्रस्तुति इसे और बड़ा स्केल देती है। लगभग 3 घंटे 15 मिनट की यह फिल्म अपने विस्तार में एक पूरी यात्रा जैसी लगती है।

कहानी किसी एक घटना पर नहीं टिकती, बल्कि छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन के कई पहलुओं को जोड़ते हुए आगे बढ़ती है। युद्ध, रणनीति और राजनीति के साथ-साथ फिल्म रिश्तों, संस्कारों और भावनाओं को भी बराबर महत्व देती है—यही चीज इसे सिर्फ “भव्य” नहीं, बल्कि “जुड़ी हुई” फिल्म बनाती है।

परफॉर्मेंस की बात करें तो रितेश देशमुख ने शिवाजी महाराज के किरदार में एक संतुलन बनाए रखा है—ना जरूरत से ज्यादा नाटकीय, ना ही फीका। संजय दत्त का अफजल खान शांत रहते हुए भी खौफ पैदा करता है, जबकि अभिषेक बच्चन संभाजी के रूप में भावनात्मक गहराई लेकर आते हैं। फरदीन खान का शाहजहां शाही ठहराव के साथ प्रभाव छोड़ता है।

सपोर्टिंग कास्ट में भाग्यश्री की जिजाऊ खास असर छोड़ती हैं, वहीं सचिन खेड़ेकर, महेश मांजरेकर, जितेंद्र जोशी और अमोल गुप्ते अपने किरदारों को मजबूती देते हैं। जेनेलिया देशमुख भावनात्मक दृश्यों में दिल छू जाती हैं, और सलमान खान का कैमियो दर्शकों के लिए सरप्राइज पैकेज जैसा है।
डायरेक्शन की बात करें तो रितेश देशमुख ने बड़े विषय को संभालने में समझदारी दिखाई है। फिल्म भव्य जरूर है, लेकिन उसमें संवेदनशीलता भी बनी रहती है। हां, इसकी लंबाई कुछ जगहों पर महसूस होती है, मगर जब-जब फिल्म अपने भावनात्मक या युद्ध वाले मोड में आती है, तो वही इसकी असली ताकत बन जाती है।

म्यूजिक की बात करें तो अजय अतुल का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को एक अलग ही ऊंचाई देता है। कई सीन सिर्फ संगीत की वजह से और ज्यादा असरदार हो जाते हैं।

फाइनल वर्डिक्ट:
“राजा शिवाजी” एक ऐसी फिल्म है जो सिर्फ देखी नहीं, महसूस की जाती है। भव्यता, भावनाएं और इतिहास—तीनों का अच्छा मेल है। थोड़ी लंबी जरूर है, लेकिन बड़े पर्दे पर इसका अनुभव इसे देखने लायक बना देता है।


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