वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में ईरान के साथ जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी वायु सेना और उसके मित्र देशों के सैन्य ठिकानों को भारी वित्तीय और रणनीतिक क्षति का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी 'कांग्रेस रिसर्च सर्विस' (CRS) द्वारा जारी की गई नवीनतम विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक अमेरिकी सेना के कम से कम 81 उन्नत सैन्य विमान और ड्रोन या तो पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं अथवा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस कुल नुकसान का अनुमानित मूल्य लगभग 3.3 अरब डॉलर (भारतीय मुद्रा में करीब 27,500 करोड़ रुपये) आंका गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वायु सेना के बेड़े को सबसे बड़ा झटका MQ-9 रीपर ड्रोन और लड़ाकू जेट विमानों के रूप में लगा है। लगभग 45 अति-आधुनिक MQ-9 रीपर ड्रोन नष्ट हो चुके हैं, जिससे अमेरिकी निगरानी और सटीक मिसाइल हमला करने की क्षमता प्रभावित हुई है। इसके अलावा, F-35A लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट, 12 F-15E स्ट्राइक ईगल, E-3 सेंट्री एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) और कई केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट इस क्षति की सूची में शामिल हैं।
सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, कुवैत में हुई फ्रेंडली फायर की घटनाओं और जॉर्डन स्थित मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस पर हुए ईरानी मिसाइल व ड्रोन हमलों ने अमेरिकी बेड़े को सबसे अधिक प्रभावित किया है। कांग्रेस रिसर्च सर्विस ने चेतावनी दी है कि उन्नत लड़ाकू विमानों और उच्च ऊंचाई वाले निगरानी ड्रोनों की अचानक कमी से अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के परिचालन बजट और रणनीतिक तैयारियों पर दूरगामी असर पड़ेगा।