अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के भीषण हादसे को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों के सवाल आज भी जस के तस हैं। जिन लोगों ने इस दुर्घटना में अपने प्रियजनों को खोया, उनके लिए हर दिन एक नई बेचैनी लेकर आता है। हादसे की असली वजह क्या थी, विमान अचानक क्यों गिरा और उस आखिरी उड़ान में आखिर क्या हुआ—इन सवालों के जवाब अब तक सामने नहीं आ पाए हैं। कई परिवार आज भी अपने अपनों की अंतिम निशानी पाने के लिए भटक रहे हैं।
इन पीड़ित परिवारों की ओर से आवाज़ उठा रहे अमेरिकी एविएशन वकील माइक एंड्रयू का कहना है कि दुख से उबरने की कोशिश तो हो रही है, लेकिन सच्चाई सामने आए बिना जख्म भरना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि कई परिवार अब भी उस मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं, जिसका वादा किया गया था। कुछ लोग तो अपने प्रियजनों के छोटे-छोटे निजी सामान—जैसे कपड़े या बैग—वापस मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जो उनके लिए अनमोल यादें हैं।
जांच प्रक्रिया को लेकर भी बेचैनी बनी हुई है। एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद उम्मीद जगी, लेकिन साथ ही सवाल और बढ़ गए। शुरुआती दिनों में सामने आए सुसाइड एंगल जैसे कयासों ने परिवारों को और तोड़ दिया। हाल ही में भारत की एएआईबी और अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड ने वॉशिंगटन में कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर की जांच की है, जिनमें हादसे से जुड़ी अहम सच्चाई दर्ज होने की संभावना है।
माइक एंड्रयू का मानना है कि हादसे के पीछे किसी गंभीर तकनीकी खामी, खासकर इलेक्ट्रिकल फेल्योर की भूमिका हो सकती है। टेकऑफ के तुरंत बाद रैम एयर टर्बाइन का सक्रिय होना और केबिन लाइट्स का अचानक बंद-चालू होना सामान्य नहीं माना जाता। उनका कहना है कि इंसाफ की प्रक्रिया तेज़ नहीं, बल्कि सटीक होनी चाहिए। यह मामला सिर्फ एक जांच नहीं, बल्कि उन आवाज़ों को समझने की कोशिश है, जो उस आखिरी उड़ान में हमेशा के लिए खामोश हो गईं।