अहमदाबाद न्यूज डेस्क: गुजरात के मुख्य सचिव मनोज कुमार दास (एम.के. दास) ने अपने नौ महीने के कार्यकाल में प्रशासनिक कामकाज और नीतिगत फैसलों से अलग पहचान बनाई है। बिहार के दरभंगा के रहने वाले 1990 बैच के आईएएस अधिकारी ने नवंबर 2025 में मुख्य सचिव का पद संभाला था। शुरुआत में माना जा रहा था कि बड़े प्रशासनिक विभागों का अनुभव रखने वाले दास के लिए सोशल सेक्टर चुनौती साबित होगा, लेकिन उन्होंने शिक्षा, पोषण और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों पर खास फोकस कर आलोचकों की धारणाओं को बदल दिया।
आईआईटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करने के बाद सिविल सेवा में आए एम.के. दास ने गुजरात में एसडीएम से लेकर जिला कलेक्टर, नगर आयुक्त, अतिरिक्त मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय में अहम जिम्मेदारियां निभाईं। केंद्र सरकार में भी वह गृह मंत्रालय में जम्मू-कश्मीर मामलों के निदेशक रह चुके हैं। उनका मानना है कि प्रशासन का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना होना चाहिए और तकनीक का इस्तेमाल लोगों की सुविधा बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।
मुख्य सचिव बनने के बाद उन्होंने राज्य में स्कूल ड्रॉपआउट कम करने, कुपोषण खत्म करने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 विजन के अनुरूप उन्होंने शाला प्रवेशोत्सव जैसे कार्यक्रमों को मजदूरों के बच्चों तक पहुंचाने की पहल की। साथ ही '3E' यानी इफेक्टिव, इफिशिएंट और ईजी गवर्नेंस मॉडल को बढ़ावा देते हुए कई सरकारी सेवाओं और प्रमाणपत्रों को ऑनलाइन करने की दिशा में काम किया।
एम.के. दास के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने विकसित गुजरात औद्योगिक नीति 2026, गुजरात ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर नीति 2025-30, गुजरात निर्यात नीति 2025, एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2025 और विकसित गुजरात डेटा सेंटर नीति 2026-29 जैसी कई नई नीतियां लागू की हैं। इनका उद्देश्य गुजरात को डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और औद्योगिक निवेश का प्रमुख केंद्र बनाना है। उनका कार्यकाल दिसंबर 2026 तक है और प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि उन्होंने अपने प्रदर्शन से सरकार का भरोसा मजबूत किया है।