अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अहमदाबाद की सीबीआई विशेष अदालत ने बैंक ऑफ बड़ौदा से जुड़े एक बड़े बैंक फ्रॉड मामले में चार निजी आरोपियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने सभी आरोपियों को तीन-तीन साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही प्रत्येक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह सजा शुक्रवार, 12 दिसंबर को सुनाई गई, जिसकी जानकारी शनिवार को आधिकारिक बयान के जरिए दी गई।
दोषी ठहराए गए आरोपियों की पहचान मनोजभाई बी. तांती, परेशभाई एम. तांती, पूर्वा परेशभाई तांती और लीलावंती एम. तांती के रूप में हुई है। ये सभी अहमदाबाद स्थित एम/एस पीएम मार्केटिंग फर्म के पार्टनर थे। सीबीआई के मुताबिक, इन लोगों ने आपराधिक साजिश के तहत फर्जी वित्तीय दस्तावेज तैयार कर बैंक ऑफ बड़ौदा से 3 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट हासिल की थी।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने जानबूझकर यह तथ्य छुपाया कि उनकी फर्म पहले से ही स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से कैश क्रेडिट सुविधा ले चुकी थी। इस महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाकर बैंक ऑफ बड़ौदा को करीब 3.48 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया, जबकि आरोपियों ने खुद को अनुचित लाभ पहुंचाया। सीबीआई ने यह भी पाया कि यह नया कर्ज फर्जी दस्तावेजों के आधार पर और एसबीआई के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से लिया गया।
सीबीआई ने इस मामले में 30 सितंबर 2008 को केस दर्ज किया था और जांच पूरी होने के बाद 11 दिसंबर 2009 को चार्जशीट दाखिल की गई थी। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने सभी चारों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। सीबीआई ने कहा कि वह बैंकिंग धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रखेगी, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।