अहमदाबाद न्यूज डेस्क: एयर इंडिया के बोइंग 787 विमान हादसे की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह हादसा 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुआ था, जिसमें 53 ब्रिटिश नागरिकों की मौत हुई थी। ब्रिटेन की वरिष्ठ कोरोनर प्रोफेसर फियोना विलकॉक्स ने रिपोर्ट में बताया कि भारत से ब्रिटेन लाए गए शवों में अत्यधिक जहरीले रसायनों का स्तर पाया गया, जिससे शवों को संभालने वाले कर्मचारियों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया। इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय शवसंभाल प्रथाओं और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विलकॉक्स ने 2 दिसंबर को जारी की गई "Prevention of Future Deaths" रिपोर्ट में बताया कि लंदन के वेस्टमिंस्टर पब्लिक मॉर्च्यूरी में काम करने वाले स्टाफ को फार्मालिन (फार्माल्डिहाइड का घोल) के अत्यधिक खतरनाक स्तर का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि शवों में फार्मालिन के अलावा कार्बन मोनोऑक्साइड और साइनाइड भी खतरनाक मात्रा में पाए गए। लाए गए शवों को लाइन किए गए ताबूतों में रखा गया था, जिनमें लगभग 40% फार्मालिन मौजूद था, जो सामान्य स्तर से कई गुना अधिक था। ताबूत खोलते ही यह अत्यधिक विषाक्त वातावरण कर्मचारियों के सामने आ गया।
रिपोर्ट के अनुसार फार्मालिन के संपर्क में आने से गंभीर शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं, जैसे मेटाबोलिक एसिडोसिस, ब्रोंकस्पाज़्म, पल्मोनरी एडिमा और गंभीर मामलों में मौत। इसके अलावा, फार्माल्डिहाइड गर्मी या रोशनी के संपर्क में आने पर कार्बन मोनोऑक्साइड छोड़ सकता है, और अमोनिया के साथ प्रतिक्रिया करके साइनाइड का निर्माण कर सकता है। कोरोनर ने कहा कि ब्रिटेन के मॉर्च्यूरी में फार्मालिन से जुड़े जोखिमों को व्यापक रूप से कम आंका गया है। खतरे का पता चलते ही मॉर्च्यूरी ने आपातकालीन प्रोटोकॉल सक्रिय किया और स्टाफ के लिए पर्यावरण निगरानी प्रणाली, रेस्पिरेटरी उपकरण और सुरक्षा गियर मुहैया कराया गया।
विलकॉक्स ने ब्रिटेन के स्वास्थ्य एवं सामाजिक देखभाल विभाग और हाउसिंग, कम्युनिटीज़ एंड लोकल गवर्नमेंट विभाग को 56 दिनों के भीतर इस तरह के खतरों को रोकने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है। ब्रिटिश सरकार के प्रवक्ता ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदनाएँ व्यक्त की और कहा कि कोरोनर की रिपोर्ट में उठाए गए गंभीर सवालों का औपचारिक रूप से अध्ययन और समाधान किया जाएगा।