अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अहमदाबाद में एयर इंडिया फ्लाइट 171 का हादसा उन परिवारों के लिए अब भी एक गहरा जख्म है, जिन्होंने बेहतर भविष्य की तलाश में यूके में बसने का सपना देखा था। यह दुर्घटना दर्जनों गुजराती परिवारों की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल गई। कई प्रवासी परिवार अपने अपनों को खोने के दर्द के साथ-साथ बढ़ती आर्थिक मुश्किलों और वीज़ा से जुड़े दबाव के कारण वापस भारत लौट आए हैं। जिन लोगों ने यूके में वर्षों की मेहनत से अपना घर-परिवार बसाया था, उन्हें अब सब छोड़कर फिर से शुरुआत करनी पड़ रही है।
इस हादसे में मारी गई कैलाशबेन को याद करते हुए उनके बेटे हिरन हयानी आज भी भावुक हो जाते हैं। वे बताते हैं कि दुर्घटना से कुछ घंटे पहले उनकी मां ने एयरपोर्ट से वीडियो कॉल करते हुए उनके बेटे के लिए लोरी गाई थी। हिरन सात साल तक लंदन में बसे रहे, लेकिन हादसे के बाद पत्नी नम्रता और तीन साल के बेटे के साथ सूरत लौट आए हैं। नम्रता, जो पहले यूके की NHS में काम करती थीं, अब एक क्लिनिक चला रही हैं, जबकि हिरन फिर से नौकरी की तलाश में हैं। वे कहते हैं कि वे यूके के ‘Indefinite Leave to Remain’ के बेहद करीब थे, लेकिन एक हादसे ने सब कुछ बदल दिया।
अमेरिकी लॉ फर्म बीस्ली एलन के एविएशन लॉयर माइक एंड्रयूज, जो 130 से अधिक पीड़ित परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने गुजरात के विभिन्न शहरों में प्रभावित परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने लीसेस्टर और वेम्बली के उन परिवारों की कहानियां सुनीं, जो मुख्य कमाने वाले को खो देने के बाद अब यूके में बढ़ते खर्च के बीच खुद को संभाल नहीं पा रहे। इसी तरह मोब्बाशेरा वहोरा की जिंदगी भी हादसे ने तहस-नहस कर दी। उनके पति परवेज और चार साल की बेटी जुवेरिया की मौत के बाद वे अपने पांच महीने के बच्चे के साथ भारत लौट आई हैं। वे कहती हैं कि उनके पति दिन-रात काम करते थे ताकि वे अपने बच्चों के लिए उज्जवल भविष्य बना सकें, मगर अब सब खत्म हो गया।
देवभूमि द्वारका के हरीश गोधनिया की कहानी भी उतनी ही दर्दनाक है। उन्होंने इस हादसे में अपनी पत्नी रिद्धि और तीन साल के बेटे क्रियांश को खो दिया। वे बताते हैं कि अब यूके में उनका कुछ नहीं बचा और वे वहां वापस जाकर क्या करते। हादसे को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन परिवारों का दर्द कम नहीं हुआ। इस फ्लाइट हादसे में 12 क्रू मेंबर और 230 यात्रियों में से 229 की मौत हुई थी, जबकि जमीन पर 19 लोगों की जान गई थी। जिन परिवारों ने विदेश में नई उड़ान भरने के सपने देखे थे, वे अब टूटे हुए भविष्य को किसी तरह फिर से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।