अहमदाबाद न्यूज डेस्क: भारत का पहला हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर—मुंबई से अहमदाबाद—देश को बुलेट ट्रेन युग में ले जाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। 508 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर 320 किमी/घंटा की रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन दौड़ेगी, जिससे मुंबई–अहमदाबाद के बीच की यात्रा महज दो घंटे में पूरी हो सकेगी। दिसंबर 2025 तक परियोजना में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है और गुजरात के सूरत से वapi तक का 100 किलोमीटर हिस्सा अगस्त 2027 में शुरू करने की तैयारी में है।
2017 में शुरू हुई यह हाईस्पीड रेल परियोजना जापान की शिंकानसेन तकनीक पर आधारित है और इसकी अनुमानित लागत 1.08 लाख करोड़ रुपये है। यह कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात और दादरा–नगर हवेली को जोड़ते हुए कुल 12 स्टेशनों से होकर गुज़रेगा। गुजरात में 348 किमी लंबे ट्रैक में से अब तक 330 किमी वायाडक्ट और 406 किमी पियर का निर्माण पूरा हो चुका है। राज्य में लगभग 70% भूमि अधिग्रहण भी समाप्त हो चुका है, जिससे निर्माण की गति और बढ़ी है।
2025 में प्रोजेक्ट का फोकस स्टील ब्रिज और टनल निर्माण पर रहा। हाईस्पीड ट्रेनों की स्थिरता को ध्यान में रखते हुए 70 मीटर लंबे भूकंप-रोधी स्टील ब्रिज स्थापित किए जा रहे हैं। वहीं, मुंबई में 7 किमी लंबी अंडरसी टनल और गुजरात में कई भूमिगत टनल्स का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। टनल बोरिंग मशीनों के उपयोग ने कार्य की गति बढ़ाने के साथ पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में भी मदद की है।
स्टेशन डेवलपमेंट के क्षेत्र में भी परियोजना कई नए मानक स्थापित कर रही है। अहमदाबाद में देश का पहला 16 मंजिला वर्टिकल रेलवे स्टेशन आकार ले रहा है, जबकि अन्य स्टेशनों को स्मार्ट सिटी सुविधाओं जैसे ईवी चार्जिंग पॉइंट से लैस किया जा रहा है। पूरे कॉरिडोर को 2028 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के पूरा होने से 20,000 से अधिक रोजगार सृजित होने, गुजरात को एक नए लॉजिस्टिक हब के रूप में उभरने और यात्रा समय घटने से अर्थव्यवस्था को लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये के लाभ का अनुमान है।