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मुद्रा विनिमय पर अरविंद पनगढ़िया का बड़ा बयान: रिजर्व बैंक को सलाह, 100 रुपये प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से न डरें और रुपये को बाजार के अनुसार गिरने दें

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Posted On:Friday, May 22, 2026


नयी दिल्ली: नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को देश की मौद्रिक नीति को लेकर एक बेहद बेबाक और महत्वपूर्ण सलाह दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में जारी व्यवधानों के बीच, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया साझा की। डॉ. पनगढ़िया ने केंद्रीय बैंक से पुरज़ोर अपील की है कि वह गिरते हुए रुपये को कृत्रिम रूप से संभालने के लिए अपने बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) का इस्तेमाल बंद करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने के बजाय रुपये को पूरी तरह से बाजार की शक्तियों (Market Forces) के अनुरूप स्वतंत्र रूप से अवमूल्यन (Depreciation) की ओर बढ़ने देना चाहिए।

जाने-माने अर्थशास्त्री ने नीति निर्माताओं को आगाह करते हुए लिखा कि 'एक डॉलर = 100 रुपये' का स्तर केवल एक मनोवैज्ञानिक आंकड़ा है और इसे किसी भी आर्थिक नीति निर्धारण का आधार नहीं बनने देना चाहिए। उनके अनुसार, 100 भी 99 या 101 की तरह महज़ एक सामान्य संख्या है। उन्होंने दो अलग-अलग परिदृश्यों के माध्यम से समझाया कि यदि कच्चे तेल की किल्लत अल्पकालिक (3 से 12 महीने) है, तो रुपया शुरुआती गिरावट के बाद तेल की कीमतें सामान्य होते ही स्वतः ही रिकवर कर लेगा। इसके अलावा, एक "सस्ता" रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भारत को एक बेहद आकर्षक निवेश गंतव्य बना देगा। वहीं, यदि तेल संकट दीर्घकालिक रहता है, तो रुपये को बचाने की कोशिश में विदेशी मुद्रा भंडार को झोंकना या प्रवासियों से ऊंचे ब्याज पर जमा स्वीकार करना घाटे का सौदा साबित होगा। पनगढ़िया ने भरोसा जताया कि साल 2013 के विपरीत आज की भारतीय अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत स्थिति में है और वह रुपये के कमजोर होने से पैदा होने वाले आंशिक मुद्रास्फीति (Inflation) के दबाव को आसानी से सहन करने की क्षमता रखती है।


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