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इमरान खान को लेकर PTI के प्रदर्शन से हिली पाकिस्तान सरकार, खैबर पख्तूनख्वा में उठा सकती है ये बड़ा कदम

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Posted On:Monday, December 1, 2025

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर सियासी तूफान चरम पर है। उनकी पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI), लगातार खान से मुलाकात की मांग कर रही है और इस मांग को मनवाने के लिए विरोध-प्रदर्शन कर रही है। खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत में PTI की सरकार और केंद्र सरकार के बीच बढ़ते टकराव के बीच, पाकिस्तान के जूनियर कानून और न्याय मंत्री, बैरिस्टर अकील मलिक ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन (Governor Rule) लगाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

गवर्नर शासन लागू करने का कारण

मंत्री मलिक ने जियो न्यूज के एक कार्यक्रम में बोलते हुए, केपी प्रांत में गवर्नर शासन लागू करने के पीछे “सुरक्षा और शासन से जुड़ी समस्याओं” को मुख्य कारण बताया। उन्होंने सीधे तौर पर खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और उनकी टीम पर हमला बोला और कहा कि वे "किसी भी तरह की कामकाजी स्थिति बनाने में बुरी तरह असफल रही है।"

डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, मलिक ने आरोप लगाया कि:

  • केपी सरकार केंद्र के साथ कोई समन्वय या तालमेल नहीं रखना चाहती।

  • वे उन क्षेत्रों में कोई कार्रवाई नहीं करते जहाँ इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है।

मलिक ने दावा किया कि केपी के मौजूदा हालात खुद इस बात की मांग करते हैं कि वहाँ प्रशासनिक ढांचा सुनिश्चित किया जाए। यह आरोप विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण हो जाता है जब मुख्यमंत्री अफरीदी और उनकी टीम ने इमरान खान से मुलाकात न करने दिए जाने पर अडियाला जेल के बाहर रात भर धरना दिया था।

कैसे लगाया जाता है गवर्नर शासन?

राज्य मंत्री (MoS) अकील मलिक ने स्पष्ट किया कि केपी में गवर्नर शासन लागू करना एक संवैधानिक कदम है, जिसे केवल "पूर्ण आवश्यकता" की स्थिति में ही उठाया जाता है।

  • संवैधानिक प्रावधान: पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत प्रधानमंत्री की सलाह पर गवर्नर शासन लगाया जाता है।

  • अधिकार: ऐसा फैसला लेने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति के पास होता है।

  • प्रक्रिया: मंत्री ने बताया कि गवर्नर की सिफारिश के अलावा, राष्ट्रपति यह कदम खुद भी उठा सकते हैं, जिसकी मंजूरी बाद में संसद के संयुक्त सत्र से लेनी होती है।

  • अवधि: संविधान के अनुसार, गवर्नर शासन शुरू में दो महीनों के लिए लगाया जा सकता है और आवश्यकता पड़ने पर इसे बढ़ाया भी जा सकता है।

मलिक ने केपी सरकार पर यह गंभीर आरोप भी लगाया कि वे “मार्गों को बंद करने और प्रांत को देश के बाकी हिस्सों से अलग करने” की योजना बना रहे हैं, जो केंद्र सरकार को यह कदम उठाने के लिए मजबूर कर सकता है।

सीएम का प्रदर्शन और गवर्नर की स्थिति

यह सियासी उथल-पुथल तब तेज हुई जब केपी के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने रावलपिंडी की अडियाला जेल के बाहर रातभर धरना दिया। उन्हें लगातार आठवीं बार पीटीआई संस्थापक इमरान खान से मिलने की अनुमति नहीं मिली थी। इस प्रदर्शन में केपी कैबिनेट के सदस्य भी शामिल थे। बाद में अफरीदी ने घोषणा की कि वह धरना समाप्त कर रहे हैं और अब इस्लामाबाद हाई कोर्ट (IHC) का रुख करेंगे।

इस बीच, केपी के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने अपने संभावित हटाए जाने की खबरों को खारिज कर दिया है, हालांकि उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टी (PPP) के फैसले को स्वीकार करेंगे। पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात के बाद, पीएम कार्यालय के सूत्रों ने संकेत दिया था कि शरीफ ने कुंडी पर पूरा भरोसा जताया है और उन्हें हटाने पर विचार नहीं किया जा रहा है।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान में केंद्र और केपी प्रांत की पीटीआई सरकार के बीच गहराता टकराव अब संवैधानिक संकट की ओर इशारा कर रहा है, जहाँ गवर्नर शासन लागू करने की धमकी दी जा रही है।


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