अहमदाबाद न्यूज डेस्क: गुजरात हाई कोर्ट में रिश्तों और अधिकारों की एक अनोखी कानूनी लड़ाई सामने आई है। लगभग 30 वर्षों से 'लिव-इन' में रह रहे एक बुजुर्ग जोड़े को तब अलग होना पड़ा, जब पुरुष की बहन ने उन्हें अपने पास रख लिया। अपने साथी की 'कस्टडी' वापस पाने के लिए 60 वर्षीय महिला को हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका दायर करनी पड़ी।
मामले की पृष्ठभूमि:
महिला और बुजुर्ग पुरुष वर्ष 1996 से एक साथ रह रहे थे। महिला का आरोप है कि पुरुष की बहन ने उन्हें जबरन अपने पास रख लिया है और उन्हें मिलने नहीं दिया जा रहा। स्थानीय पुलिस और पुलिस आयुक्त से मदद न मिलने पर महिला ने अदालत की शरण ली।
अदालत में क्या हुआ?
साथी की इच्छा: हाई कोर्ट के आदेश पर जब बुजुर्ग व्यक्ति को पेश किया गया, तो वे शारीरिक रूप से अस्वस्थ और कमजोर दिखे। हालांकि, उन्होंने जज के सामने स्पष्ट किया कि वे अपनी महिला पार्टनर के साथ ही वापस जाना चाहते हैं।
बहन की दलील: पुरुष की बहन ने आरोपों को नकारते हुए दावा किया कि महिला की रुचि उनके भाई की पारिवारिक संपत्ति में है। बहन का कहना है कि वह केवल अपने बीमार भाई की सेवा कर रही हैं।
अगली कार्रवाई:
कोर्ट ने बुजुर्ग व्यक्ति की इच्छा को सुना, लेकिन कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने और बहन को अपना विस्तृत पक्ष रखने का मौका देने के लिए समय दिया है। अब इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई जून 2026 में होगी।