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सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने की प्रवृत्ति पर सीजेआई सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी, कहा- "अगर हाई कोर्ट छींकता भी है, तो आ जाती है SLP"

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Posted On:Thursday, September 17, 2026

"हाई कोर्ट कुछ भी करे, पहुंच जाते हैं सुप्रीम कोर्ट"

मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कटाक्ष करते हुए कहा, “अगर हाई कोर्ट छींकता भी है, तो एसएलपी आ जाती है।”

  • अदालती कार्यप्रणाली पर टिप्पणी: सीजेआई ने आगे स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि हाई कोर्ट सुनवाई टाल दे, किसी दस्तावेज को रिकॉर्ड पर ले ले, या कोई अन्य छोटी-मोटी कार्रवाई करे—लगभग हर स्थिति और आदेश के खिलाफ एसएलपी दाखिल कर दी जाती है।

  • मामले की पृष्ठभूमि: दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में आर्बिट्रेशन से जुड़े एक मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी। इस दौरान वकील ने दलील दी कि हाई कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु पर विचार नहीं किया कि मध्यस्थ (Arbitrator) का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है। इसी संदर्भ में सीजेआई ने अदालतों में मुकदमों के बढ़ते बोझ और हर आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती देने के चलन पर यह टिप्पणी की।

क्या है विशेष अनुमति याचिका (SLP)?

संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत, विशेष अनुमति याचिका (SLP) के माध्यम से देश के किसी भी उच्च न्यायालय या न्यायाधिकरण के किसी भी आदेश या फैसले के खिलाफ सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। हालांकि, शीर्ष अदालत का मानना है कि इस प्रावधान का इस्तेमाल हर मामूली या अंतरिम आदेश के लिए नहीं किया जाना चाहिए, जिससे देश की सर्वोच्च अदालत पर अनावश्यक मुकदमों का बोझ पड़ता है।


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