अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अहमदाबाद एयर इंडिया हादसे को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब भी कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं। इस बीच अमेरिका के एविएशन अटॉर्नी माइक एंड्रूज ने भारत सरकार से एक बार फिर फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) को सार्वजनिक करने की मांग रखी है। एंड्रूज उन 130 से अधिक परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिन्होंने इस दुर्घटना में अपने प्रियजनों को खोया। उनका कहना है कि डेटा जारी होने से जांच में पारदर्शिता आएगी और पीड़ित परिवार यह तय कर सकेंगे कि कानूनी रूप से आगे क्या कदम उठाया जाए।
एंड्रूज ने हादसे के इकलौते जीवित बचे यात्री विश्वास कुमार रमेश के बयान को भी बेहद अहम बताया है। विश्वास ने कहा कि टक्कर से ठीक पहले विमान के अंदर की लाइटें झपकी थीं और अचानक हरे रंग में बदल गई थीं। यह संकेत है कि विमान मुख्य बिजली सप्लाई से बैकअप सिस्टम पर चला गया था, जिससे गंभीर इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी की संभावना को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
माइक एंड्रूज का कहना है कि बोइंग 787 विमानों में पानी रिसने और सिस्टम फेल होने के कई मामले पहले भी देखे गए हैं। इसलिए यह स्पष्ट होना बहुत ज़रूरी है कि इस हादसे की जड़ कहीं वही समस्या तो नहीं। उन्होंने गुजरात में मृतकों के परिवारों से मुलाकात कर कहा कि FDR डेटा सार्वजनिक किया जाए ताकि स्वतंत्र विशेषज्ञ जांच कर सकें—क्योंकि पारदर्शिता हर परिवार का अधिकार है।
अमेरिका में भी उन्होंने फ्रीडम ऑफ इनफॉर्मेशन एक्ट के तहत एफएए से सूचना मांगने की पहल की है, क्योंकि माना जा रहा है कि भारत के AAIB जांच डेटा का कुछ हिस्सा अमेरिकी अधिकारियों के पास है। एंड्रूज अब आणंद, वडोदरा और मुंबई में उन परिवारों से मिल रहे हैं जो कानूनी लड़ाई जारी रखना चाहते हैं। गौरतलब है कि 12 जून को अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के तुरंत बाद एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 बोइंग 787-8 एक मेडिकल हॉस्टल से टकराकर आग में बदल गई थी, जिसमें 242 में से 241 यात्रियों की मौत हो गई थी, और जमीन पर भी 19 लोगों की जान चली गई थी। केवल विश्वास कुमार ही जीवित बच सके।