ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के सरकारी आवास के बाहर रविवार को उस समय हड़कंप मच गया और स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब विरोध-प्रदर्शन कर रही तीन महिलाओं में से दो ने अचानक जहर खा लिया। जमीन विवाद में न्याय न मिलने और प्रशासनिक देरी से नाराज इन महिलाओं ने आत्मघाती कदम उठाया। सुरक्षाकर्मियों और पुलिस की मुस्तैदी के कारण दोनों महिलाओं को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे उनकी जान बच सकी।
जमीन विवाद को लेकर चल रहा था प्रदर्शन
भुवनेश्वर के पुलिस उपायुक्त (DCP) जगमोहन मीना ने घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह पूरी घटना लोअर पीएमजी (Lower PMG) इलाके में हुई, जो सरकार द्वारा विरोध-प्रदर्शन के लिए तय की गई आधिकारिक जगह है। खुर्दा जिले के बनपुर इलाके की रहने वाली तीन महिलाएं पिछले कुछ समय से अपने क्षेत्र में चल रहे एक गंभीर जमीन विवाद को सुलझाने की मांग को लेकर लगातार वहां धरना दे रही थीं।
महिलाओं का आरोप था कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस उनके जमीनी विवाद को सुलझाने में जानबूझकर देरी कर रहे हैं, जिससे तंग आकर वे मुख्यमंत्री से गुहार लगाने राजधानी पहुंची थीं।
पब्लिक टॉयलेट में जाकर उठाया आत्मघाती कदम
डीसीपी जगमोहन मीना के मुताबिक, प्रदर्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए भुवनेश्वर पुलिस ने खुर्दा के बनपुर स्थानीय थाने के पुलिसकर्मियों को प्रदर्शन स्थल पर बुलाया था। योजना यह थी कि इन महिलाओं को समझा-बुझाकर पुलिस सुरक्षा में उनके गृह क्षेत्र (बनपुर) ले जाया जाए, ताकि वहां के स्थानीय अधिकारियों की मौजूदगी में जमीनी विवाद का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
लेकिन बनपुर के लिए रवाना होने से ठीक पहले, तीनों में से दो महिलाओं ने सुरक्षाकर्मियों से पब्लिक टॉयलेट जाने की अनुमति मांगी। टॉयलेट के भीतर जाकर दोनों महिलाओं ने कथित तौर पर पहले से अपने पास छिपाकर रखा हुआ जहर खा लिया। जब वे बाहर आईं, तो उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और वे अचेत होने लगीं।
अस्पताल में भर्ती, डॉक्टरों ने बचाई जान
महिलाओं को तड़पता देख वहां तैनात पुलिस बल के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में दोनों पीड़ित महिलाओं को भुवनेश्वर के कैपिटल हॉस्पिटल (Capital Hospital) के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया।
DCP मीना ने बताया: "अस्पताल लाते ही डॉक्टरों की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला। दोनों महिलाओं का पोटाश पानी (Potash Water) से क्रिटिकल इलाज किया गया और उन्हें उल्टी करवाई गई ताकि जहर के असर को खत्म किया जा सके। शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, दोनों महिलाओं का इलाज सफल रहा है और अब वे पूरी तरह खतरे से बाहर हैं।"
इस घटना ने मुख्यमंत्री आवास के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर जमीनी विवादों के निपटारे में होने वाली प्रशासनिक देरी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है कि महिलाओं के पास जहर कहां से आया।