ताजा खबर
अहमदाबाद: इंस्टाग्राम पोस्ट पर दी थी चुनौती, तो तीन युवकों ने 19 साल के लड़के को चाकू मारकर उतारा मौ...   ||    अहमदाबाद नगर निगम चुनाव: स्थानीय समस्याओं पर भारी पड़े राष्ट्रीय मुद्दे; 26 अप्रैल को होगा मतदान   ||    रिहाना की भारत में धमाकेदार वापसी, मुंबई एयरपोर्ट पर दिखा ग्लोबल स्टार का जलवा   ||    ईद 2027 पर सलमान खान का बड़ा दांव, SVC63 से बनेगा मेगा ब्लॉकबस्टर प्लान   ||    अनुपम खेर ने याद किया माइकल जैक्सन संग खास पल, बोले- “वो सिर्फ कलाकार नहीं, एक एहसास थे”   ||    ‘किंग’ का टीजर रिलीज: शाहरुख खान की दहाड़ इस क्रिसमस मचाएगी तहलका   ||    कच्चे तेल में उबाल $103 के पार पहुँचा ब्रेंट क्रूड, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बड़ा अपडेट   ||    ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की 'रहस्यमयी' चुप्पी गंभीर चोटों और सर्जरी के बीच IRGC ने संभ...   ||    युद्ध के खर्च ने रूस को सोना बेचने पर किया मजबूर बजट घाटे को पाटने के लिए पुतिन सरकार ने खंगाला खजान...   ||    ‘अमेरिका में भारत को लेकर गलत धारणाएं’, वाशिंगटन में बोले RSS महासचिव दतात्रेय होसबोले   ||   

2025 में RBI ने रेपो रेट में की रिकॉर्ड कटौती, अर्थव्यवस्था को मिले राहत के संकेत लेकिन चुनौतियाँ बरकरार

Photo Source :

Posted On:Thursday, December 11, 2025

जब भी भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने लगती है या महंगाई नियंत्रण से बाहर होने लगती है, तब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अपनी मौद्रिक नीति के माध्यम से स्थिरता लाने की कोशिश करता है। RBI की मौद्रिक नीति समिति हर दो महीने बैठक कर महंगाई, ब्याज दरों, लोन की लागत और GDP ग्रोथ का आकलन करती है। इसके आधार पर यह तय किया जाता है कि बाजार में कितनी नकदी रहनी चाहिए और लोन सस्ता या महंगा करके आर्थिक गतिविधियों को कैसे संतुलित रखा जाए। 2025 में भी आर्थिक परिस्थितियाँ निरंतर बदल रही थीं। महंगाई दबाव, वैश्विक आर्थिक सुस्ती और रुपये की कमजोरी ने स्थिति को चुनौतीपूर्ण बनाया हुआ था। ऐसे समय में RBI ने जनता, उद्योगों और मार्केट को राहत देने के उद्देश्य से ब्याज दरों में महत्वपूर्ण कटौती की।

2025 में RBI ने कब और कितनी की कटौती?

वर्ष 2025 में RBI ने कई चरणों में कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की और रेपो रेट को 6.5% से घटाकर 5.25% तक ले आया। यह कटौती पूरे साल चार बार की गई—

  • फरवरी 2025: 25 बेसिस प्वाइंट

  • अप्रैल 2025: 25 बेसिस प्वाइंट

  • जून 2025: 50 बेसिस प्वाइंट (उम्मीद से दोगुनी कटौती)

  • दिसंबर 2025: 25 बेसिस प्वाइंट

रेपो रेट में कमी का सीधा असर देश की सामान्य जनता और उद्योगों दोनों पर पड़ता है। लोन की ब्याज दरें कम हो जाती हैं, जिससे

  • घर और कार लोन सस्ते

  • EMI कम

  • उपभोक्ता खर्च में बढ़ोतरी

  • मांग में वृद्धि

जैसी स्थितियाँ पैदा होती हैं। यह बाजार में सकारात्मक गति लाती है। दूसरी ओर, कंपनियों के लिए भी पूंजी सस्ती हो जाती है। कम ब्याज दर पर कर्ज मिलने से उनका कैश फ्लो सुधरता है और निवेश की संभावनाएँ बढ़ती हैं। लेकिन, इसमें एक चुनौती भी है—ब्याज दरों में ज्यादा गिरावट होने पर कैपिटल आउटफ्लो यानी विदेशी निवेशकों के पैसे बाहर जाने की संभावना बढ़ जाती है। क्योंकि यदि अन्य देशों में ब्याज दर अधिक है, तो निवेशक अपना पैसा भारतीय बाजार से निकालकर वहां लगाना पसंद करते हैं। इससे रुपये पर तनाव बढ़ जाता है और वह डॉलर के मुकाबले और कमजोर हो सकता है।

RBI की नीतियों से अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा?

दिल्ली यूनिवर्सिटी के आर्यभट्ट कॉलेज की अर्थशास्त्री डॉ. आस्था आहुजा बताती हैं कि RBI के फैसले सीधे तौर पर शेयर बाजार, निवेश, महंगाई और रुपये की चाल को प्रभावित करते हैं।

उनके अनुसार—

  • रेपो रेट घटने से मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ती है

  • कंपनियों के लिए कर्ज सस्ता होता है

  • निवेशकों की भावनाओं में सुधार आता है

  • आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार बढ़ती है

लेकिन, इन सकारात्मक संकेतों के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। भुगतान संतुलन (Balance of Payments), महंगाई और रुपये की मजबूती पर भी इसका असर पड़ता है। वर्ष 2025 में भारत का रुपया पहले ही डॉलर के मुकाबले 90 से ऊपर पहुंच चुका है, जिससे आयात महंगा होने और महंगाई बढ़ने की आशंका बनी रहती है।

डॉ. आहुजा ने बताया कि स्टॉक मार्केट का वर्तमान रूप काफी मिश्रित है—

  • लार्ज-कैप शेयर मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं

  • लेकिन मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेक्टर दबाव में हैं

कारण है—बाजार में मांग कमजोर पड़ना और निवेशक सतर्कता।

आरबीआई की चुनौती—संतुलन बनाए रखना

रिज़र्व बैंक के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती है मौद्रिक नीति में संतुलन बनाए रखना। उसे—

  • महंगाई नियंत्रित रखनी है

  • आर्थिक विकास की गति को भी बढ़ाना है

  • रुपये की गिरावट पर ब्रेक लगाना है

इन तीनों मोर्चों को एक साथ संभालना बेहद कठिन होता है। फिर भी, 2025 में RBI द्वारा की गई ब्याज दरों की कटौती ने आर्थिक गतिविधियों में कुछ हद तक सुधार लाया है। आने वाले महीनों में देश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में बढ़ेगी, यह काफी हद तक वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेश प्रवाह और घरेलू मांग पर निर्भर करेगा।


अहमदाबाद और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. ahmedabadvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.